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अपनी प्रतिभा को कैसे पहचानें, यह आपकी रचनात्मकता को बढ़ाने में कैसे सहायक है?

अपनी प्रतिभा को कैसे पहचानें, यह आपकी रचनात्मकता को बढ़ाने में कैसे सहायक है?

अपनी प्रतिभा को कैसे पहचानें, यह आपकी रचनात्मकता को बढ़ाने में कैसे सहायक है?

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प्राणी जगत में सभी लोग एक जैसे गुण वाले नहीं होते हैं। सभी की कुछ ना कुछ अलग विशेषता होती है, जो उन्हें एक दूसरे से अलग करती है। ठीक उसी तरह सभी लोगों में कुछ विशेष प्रतिभा होती है। इसी प्रतिभा विशेष को पहचानकर और इसे अपने जीवन शैली में शामिल कर कुछ लोग अपने कार्य क्षेत्र में आगे बढ़ जाते हैं। ठीक इसके विपरीत अन्य पीछे रह जाते हैं, क्योंकि उन्हें या तो अपने प्रतिभा की पहचान नहीं होती य फिर वे इसे प्रयोग में नहीं लाते। (creativity development, creativity skills, creativity process, creativelive)

यही प्रतिभा, रचनात्मक क्षमता को बढ़ाता है। तो जरूरत है हमें अपने अंदर छुपे इस विशेष कला या गुण को बाहर लाने की। यह रचनात्मकता आपके अंदर लेखक, संगीतकार, फिंगर पेंटर, शेफ, गीतकार, उद्यमी, फिल्म निर्माता, हास्य अभिनेता, राजनीतिज्ञ आदि के रूप में छुपा हुआ हो सकता है। नीचे दिये गए कथन आपकी रचनात्मकता बढ़ाने में सहायक है:

आंतरिक संतुष्टि वाले कार्य की पहचान:

हम कभी-कभी कुछ ऐसी कार्य करते हैं, जिसका हमें अच्छा प्रतिक्रिया और अनुभव प्राप्त होने के साथ साथ आंतरिक संतुष्टि भी मिलती है। लेकिन आगे चलकर हम किसी कारण वश इसे अनदेखा कर देते हैं और इससे दूर हो जाते हैं। यहाँ हम अपनी इस विशेष रचनात्मकता को अपनाकर आगे बढ़ सकते हैं।


अपने मन की सुनें:

कभी – कभी आपका मन आपसे कुछ विशेष कहना चाहता है, लेकिन शायद आप इसे असंभव मानकर या कल्पनिक सोचकर या फिर किसी अन्य कारण वश अनसुना कर देते हैं, चाहे यह आपके लिए लाभदायक हीं क्यों ना हो? तो यहाँ हमें जरूरत हैं ऐसी चीजों को जाँचकर या सलाह लेकर अपने जीवन में शामिल करने की।    


दूसरों की नक़ल नहीं करें :

किसी कारण वश कभी-कभी हम अपनी प्रतिभा को त्यागकर दूसरों की नक़ल करने लगते हैं, लेकिन हम उनके जैसा नहीं बन पाते। इसके पीछे कारण यह उनकी विशेष प्रतिभा है, जो कि हमारी प्रतिभा से अलग है, इसलिये हमें अन्य प्रतिभा का लाभ नहीं मिल पता है। इसलिये हमें अपनी विशेष प्रतिभा के साथ ही आगे बढ़ना चाहिए ।

जिज्ञासु बनें :

साधारणतया अपने मन में उठ रहे सवालों को हम अपनी कमजोरी के तौर पर लेते हैं। लेकिन, ऐसा नहीं है, क्योंकि जिज्ञासा ही रचनात्‍मकता और ज्ञान का बीज है। इसलिये जब भी आपके मन में किसी बात को लेकर जिज्ञासा उठे, तो आप उसके प्रति सकारात्मक हों फिर उसका हल पाने में जुट जाएं। इससे आपको उस विषय के सम्बंधित नये आयाम को खोजने का अवसर मिलेगा।

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जोखिम लेने को तैयार रहें:

आप अपनी क्षमताओं को तभी बढ़ा सकते हैं जब आप जोखिम उठाने को तैयार हों। इसलिए  बिना जोखिम उठाये रचनात्‍मकता को प्रभावी रूप से बढ़ाना असंभव है। आपको हमेशा अपने प्रयासों में कामयाबी ही मिले ऐसा जरूरी नहीं है। फिर भी इसके बावजूद लगातार प्रयास करते रहने होंगे, यह सब भविष्‍य में आपके बहुत काम आएगा।


अपना विश्‍वास पर अडिग  रहें:

अपनी क्षमताओं पर विश्‍वास रखें। इस पर संदेह कर आप खुद की रचनात्‍मकता को नुकसान पहुंचा सकते हैं। इसलिए जरूरी है कि अपने आत्‍मविश्‍वास का दामन कभी न छोड़ें। आप अपने सफर के दौरान अभी तक जो हासिल किया है, उसका एक  नोट बनायें। साथ ही साथ अपने प्रयासों की भी सराहना करें, यह आपके अंदर सकारात्मक उर्जा देगा । इसके अलावे  हर बार पहले से बेहतर करने की अपनी कोशिश करें।

प्रेरणास्रोत एक खोज

नकारात्‍मकता विचार का त्याग करें:

सकरात्‍मक माहौल आपको रचनात्‍मक सोचने में मदद करता है। इसलिये रचनात्‍मक बने रहने के लिए  आपका अच्‍छे मूड में रहना जरूरी है। ऐसे नकारात्‍मक चीजें जो आपको परेशान करते हैं उसे अपने सोच के दायरे के बाहर करें। यह आप में  मजबूत क्रिएटिव स्किल डेवलप करने में मदद करेगी।

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डर के आगे जीत है:

आप अक्सर सुनते हैं कि ‘डर के आगे जीत है’।  नाकामयाबी या गलती होने का डर आपके सफर को नाकामी के ओर ले जा सकता है। इसलिए जब भी आप स्‍वयं को इस तरह की भावनाओं से उलझा हुआ पायें, तो अपने आप को  यह समझायें कि यह तो इस सफर का हिस्‍सा भर हैं। सफर में जब भी आप खुद को लड़खड़ाता हुआ पायें, तो आप थक कर नहीं रुकें क्योंकि यदि ऐसा होता है तो आपके लिए आगे बढ़ पाना मुश्किल हो जाएगा। जरूरी है कि लक्ष्‍य पर अपनी नजर बनायें रखें और लगातार आगे बढ़ते रहें।


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