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Elena Cornaro Piscopia के जन्मदिन पर गूगल ने डूडल बनाकर दिया सम्मान, जानें कौन थीं एलेना?

Elena Cornaro Piscopia के जन्मदिन पर गूगल ने डूडल बनाकर दिया सम्मान, जानें कौन थीं एलेना?

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गूगल अपने डूडल का  प्रयोग अक्सर विश्व के सामने ऐसे लोगों की प्रतिभा को उजागर करने के लिए करता है, जिन्होंने अपने कार्य के द्वारा दुनिया के सामने एक मिशाल कायम की। इस कड़ी में 5 जून का डूडल कोई अपवाद नहीं है। आज सर्च इंजन गूगल ने विश्व की प्रथम पीएचडी धारक महिला एलेना कॉर्नारो पिस्कोपिया के सम्मान में उनके 373 जन्मदिन पर अपने डूडल को समर्पित किया। (Elena Cornaro Piscopia, google doodle for today, google doodle today )

कैलिफ़ोर्निया की कलाकार एलिसा विनन्स द्वारा तैयार, बुधवार के डूडल में इटली के वेनिस की एक विद्वान महिला एलेना कॉर्नारो पिस्कोपिया को दिखाया गया है, जो 1678 में डॉक्टरेट से सम्मानित होने वाली दुनिया की पहली महिला बनी थीं। डूडल द्वारा पुस्तकालय में एक पुस्तक के साथ पिस्कोपिया को दिखाया, जिसमें एलिसा विनन्स ने यह दिखाने की कोशिश की है कि ऐलेना कितनी खुश थी ‘जब वह निर्विवाद रूप से अध्ययन करने में सक्षम थी।


एलेना को उसके बचपन के वर्षों में लैटिन और ग्रीक की क्लासिक भाषाओं में प्रशिक्षित किया गया था और अध्ययन में उनकी गहरी रूची थी। उन्होंने कुल सात भाषाओं में महारत हासिल की। हालांकि, उन्हें डिग्री की गिनती बढ़ाने में कोई रूची नहीं थी, वह सिर्फ ज्ञान संचय में दिलचस्पी रखती थी। पिता के आग्रह पर उन्होंने पडुआ विश्वविद्यालय में डॉक्टर ऑफ थियोलॉजी पाठ्यक्रम में दाखिले के लिए अनुरोध किया।

लेकिन यह 1670ई था जब रोमन कैथोलिक चर्च एक महिला को इस तरह की उपाधि नहीं देना चाहता था। आखिरकार, चर्च ने ऐलेना को डॉक्टर ऑफ फिलॉसफी के लिए आवेदन करने की अनुमति दी और इसलिए उन्होंने ऐसा किया भी ।

एलेना को हेलेन कॉर्नारो के नाम से भी जाना जाता है साथ हीं उन्हें एक दार्शनिक के रूप में भी पहचान मिली। इसके अलावे उन्होंने संगीत और भाषा विज्ञान जैसे विषयों में भी उन्होंने उदाहरण प्रस्तुत किए। गणित, दर्शन और धर्म से जुड़े अध्ययन में भी अपना वक्त देने वाली एलेना को संगीत में भी विशेष रुचि थी। संगीत के क्षेत्र में भी उन्होंने अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया और कई वाद्य यंत्र बजाने में महारत हासिल की।


वीणा, वायलिन, हार्प्सिकॉर्ड और क्लाविकॉर्ड बजाना सीखने के बाद उन्होंने कई धुनें भी बनाईं। भौतिकी, खगोल विज्ञान और भाषा विज्ञान में भी उन्होंने खुद को साबित किया। खराब स्वास्थ्य स्थितियों और व्यापक धर्मार्थ कार्यों के कारण उनकी मृत्यु हो गई। 26 जुलाई, 1648 में मृत्यु से पहले जीवन के आखिरी सात साल शिक्षा और चैरिटी के नाम किए। (Elena Cornaro Piscopia, google doodle for today, google doodle today)


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