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इस तारीक को पूर्ण चंद्रग्रहण, ‘सुपर ब्लड मून’ की तरह होगा

इस तारीक को पूर्ण चंद्रग्रहण, ‘सुपर ब्लड मून’ की तरह होगा

इस तारीक को पूर्ण चंद्रग्रहण, ‘सुपर ब्लड मून’ की तरह होगा


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एक विशेष खगोलीय घटना इस रविवार यांनी 20 जनवरी की रात के लिए कैलेंडर में शामिल हो चुका है और विशेषज्ञ पहले से ही इस घटना(lunar eclipse india, chandra grahan 2019 january, total lunar eclipse blood moon) की भाविष्यवाणी कर रहे हैं: 

Sky and Telescope Magazine पत्रिका कहती है, ”पूर्णता के लिए पूरे 62 शानदार मिनट”।

‘2019 का एकमात्र पूर्ण चंद्रग्रहण,’ NASA कहता है। 

‘यह पूर्ण चन्द्रमा 2019 के सबसे बड़े आकार में से एक होगा,’ Space.com की रिपोर्ट से।


रविवार की रात लगभग 9:30 बजे चंद्रमा पृथ्वी की छाया के भाग में रेंगना शुरू कर देगा जिसे पेनम्ब्रा के रूप में जाना जाता है। नासा के अनुसार इस समय बहुत अधिक अंधेरा नहीं दिखाई देगा।  रात लगभग 10:33 बजे तक आपको देखने को मिलेगा कि  पृथ्वी की छाया चंद्रमा की सतह पर प्रभावी रूप से बढ़ना शुरू हो गया  है और यह बढ़ता ही जा जाएगा जब तक कि यह पूरी तरह से कवर नहीं करता है। रात 11:41 बजे लगभग ग्रहण की पूर्णता को चिह्नित करेगा, क्योंकि चंद्रमा पूरी तरह से पृथ्वी से ढका हुआ होगा।

कम कार्बोहाइड्रेट वाले आहार वजन घटाने में सहायक, रिपोर्ट

नासा के मुताबिक सुपर मून या फुल मून पर चंद्रमा अन्य दिनों के मुकाबले धरती के  सबसे करीब 3,63,000 किमी दूर होता है। जब चंद्रमा पृथ्वी से सर्वाधिक दूरी पर होता है तब वह 4,05,000 किमी की दूरी पर होता है। नासा के गोडार्ड स्पेस फ्लाइट सेंटर के रिसर्च साइंटिस्ट डॉ नोआह पेट्रो के मुताबिक सुपर मून पर चंद्रमा आम दिनों के मुकाबले 14 फीसदी बड़ा और 30 फीसदी अधिक चमकदार  होता है। इस दौरान चांद का रंग लाल तांबे जैसा नजर आता है, इसलिए इसे ब्लड मून भी कहा जाता है।

जैसा कि नासा बताती है, वायुमंडल द्वारा प्रकाश को बिखेरने के कारण लाल छाया का निर्माण होता है। जब सूर्य एक कोण पर आता है – सूर्यास्त के समय, सूर्योदय या पृथ्वी के दूसरी ओर चंद्रमा के परिप्रेक्ष्य से – सूरज की लालिमा प्रकाश पर हावी हो जाती है। वह प्रकाश पृथ्वी के वातावरण में धूल, प्रदूषकों या अन्य कणों के आधार पर बदल भी सकती  है।


इस ग्रहण को नेटिव अमेरिकी जनजातियों ने वोल्फ मून नाम दिया है। पूर्णिमा की रात को भोजन की तलाश में निकलने वाले भेड़िये उसे देखकर जोर-जोर से आवाज लगाते हैं। इसलिए इस चंद्र ग्रहण को यह यूनीक नाम दिया गया है।

उत्तरी और दक्षिणी अमेरिका में सुपर ‘ब्लड मून’ का सबसे अच्छा दृश्य रहेगा। यदि मौसम सही रहा तो यूरोपीय और अफ्रीकी भी इसका लुफ्त उठा सकेंगे। जबकि भारत में यह ग्रहण दिखाई नहीं देगा। बताया जा रहा है कि तीन खगोलीय घटनाओं के संयोग से बना यह पूर्ण चंद्र ग्रहण रात को आसमान में अद्भुत नजारे दिखाएगा। जिन क्षत्रों में भी यह दिखाई देगा वहां इस अद्भुत नजारे को बिना किसी उपकरण के खुली आंखों से देखा जा सकेगा।



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