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कौन थे मदनलाल खुराना?

कौन थे मदनलाल खुराना?

कौन थे मदनलाल खुराना?


भाजपा नेता और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री मदन लाल खुराना का शनिवार की रात को राष्ट्रीय राजधानी में निधन हो गया। शनिवार की रात 11 बजे कीर्ति नगर स्थित आवास पर उन्होंने अंतिम सांस ली। 82 वर्षीय खुराना का पार्थिव शरीर आज 12 बजे भाजपा के दिल्ली कार्यालय, 14 पंडित पंत मार्ग पर अंतिम दर्शन के लिए रखा जाएगा। खुराना के बेटे और दिल्ली भाजपा प्रवक्ता हरीश खुराना ने बताया है कि उनके पिता का आज तीन बजे निगम बोध घाट पर अंतिम संस्कार किया जाएगा.

वो 1993-96 के बीच दिल्ली में सत्ता के शीर्ष पर थे, उन्हें राष्ट्रीय राजधानी में भाजपा को मजबूत बनाने के प्रयासों के लिए ‘दिल्ली का शेर’  कहा जाता था। 69 वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1 99 1 के माध्यम से राज्य विधान सभा को बहाल करने के बाद वह दिल्ली की सेवा करने वाले पहले मुख्यमंत्री थे। चार बार संसद रहे खुराना  ने 2006 में राजस्थान के राज्यपाल के रूप में भी कार्य किया। उन्होंने अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में संसदीय मामलों और पर्यटन मंत्री के रूप में भी कार्यभार संभाला। दिल्ली के लिए पूर्ण राज्य के एक मुखर समर्थक खुराना दिल्ली सरकार की शक्ति के संदर्भ में केंद्र और राज्य के बीच संबंधों के एक गंभीर आलोचक थे।

खुराना अपनी पत्नी, एक बेटे और दो बेटियों के देखरेख  में थे। वे कई दिनों से बीमार चल रहे थेा। उन्हें लगभग पांच साल पहले मस्तिष्क के रक्तचाप का सामना करना पड़ा था और तब से बीमार थे। परिवार के अनुसार, वह पिछले कुछ दिनों से सीने में संक्रमण और बुखार से भी पीड़ित थे और शनिवार सुबह से ही उन्हें सांस लेने में दिक्कत हो रही थी।

प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को ट्वीट किया कि ‘श्री मदन लाल खुराना जी के निधन से दुखी हूँ। उन्होंने विशेष रूप से बेहतर बुनियादी ढांचे को सुनिश्चित करने के लिए दिल्ली की प्रगति के लिए अथक रूप से काम किया। उन्होंने दिल्ली सरकार और केंद्र दोनों में एक मेहनती और लोगों के अनुकूल प्रशासक के रूप में खुद को प्रतिष्ठित किया’ ।

बीजेपी के अध्यक्ष अमित शाह ने भी खुराना की मौत पर शोक व्यक्त किया। ‘दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री और बीजेपी नेता मदन लाल खुराना के दुर्भाग्यपूर्ण निधन के बारे में जाना। शाह ने ट्वीट किया कि उन्हें एक आदर्श स्वयंसेवक और एक समर्पित विद्यार्थी परिषद कार्यकर्ता और जनसंघ और भाजपा का एक मजबूत स्तंभ माना जाएगा। उन्होंने कहा कि दिल्ली में संगठन को मजबूत बनाने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका थी और वह ‘दिल्ली के शेर’ के रूप में लोकप्रिय थे। शाह ने कहा, ‘करोड़ों बीजेपी कार्यकर्ताओं की तरफ से, मैं खुराना जी के परिवार को अपनी शोक व्यक्त करता हूं और मृत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करता हूं।’


वे उन नेताओं में शामिल थे जो भाजपा की स्थापना के पहले से ही संघ परिवार से जुड़े हुए थे। वह 1965 से 1967 तक जनसंघ के महासचिव रहे और दिल्ली में जनसंघ के चर्चित चेहरों में रहे।  खुराना का जन्म मौजूदा पाकिस्तान के फै़सलाबाद में हुआ था और बंटवारे के बाद उनका परिवार दिल्ली के कीर्ति नगर की एक रिफ्यूजी कॉलोनी में आकर बस गया था। उस दौर में राष्ट्रीय राजधानी बाहरी इलाक़ों से आकर बसे पंजाबियों और व्यापारियों के प्रभुत्व वाला शहर माना जाता था और यह एक बड़ी वजह रही कि दिल्ली भाजपा में लंबे समय तक मदनलाल खुराना, विजय कुमार मल्होत्रा और केदारनाथ साहनी की तिकड़ी का एकछत्र राज रहा।

हालांकि बाद में दिल्ली में पूर्वांचल से आए लोगों की तादाद बढ़ी और भाजपा और कांग्रेस दोनों पार्टियों में शक्तियां पूर्वांचल के नेताओं की ओर खिसकती चली गईं। जब 2014 के आम चुनावों का ऐलान हुआ तो कभी खुराना के चुनाव कॉर्डिनेटर रहे सतीश उपाध्याय को भाजपा ने प्रदेश अध्यक्ष बना दिया। सतीश उपाध्याय के बाद अब एक और पूर्वांचली नेता मनोज तिवारी दिल्ली में बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष हैं।

 

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