मेजर ध्यानचंद: हॉकी के महान खिलाड़ी

मेजर ध्यानचंद: हॉकी के महान खिलाड़ी

मेजर ध्यानचंद: हॉकी के महान खिलाड़ी


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लगभग चार दशकों से आज -29 अगस्त – देश भर में राष्ट्रीय खेल दिवस(national sports day of India, national sport of India, national sports day India) के रूप में मनाया जाता है। इसका कारण यह है कि यह तिथि  महान भारतीय खिलाड़ी – हॉकी लीजेंड मेजर ध्यान चंद(Major dhyan chand information, Major dhyan chand in Hindi) की जयंती है। क्रिकेट में ब्रैडमैन की तरह, अपने क्षेत्र में ध्यान चंद की प्रतिभा ने उन्हें हॉकी का जादूगर बनाया, जो आज के युवा के प्रेरणास्रोत हैं। हर साल आज के दिन खेल में शानदार प्रदर्शन के लिए राजीव गांधी, खेल रत्न के अलावा अर्जुन अवॉर्ड और द्रोणाचार्य अवॉर्ड दिए जाते हैं।

उनसे सम्बन्धित एक ऐसा किस्सा है जो काफी चर्चा में रहा था। ध्यानचंद के खेल को देखकर हिटलर तक दीवाने हो गए थे और उन्होंने जर्मन सेना के कर्नल बनाने का प्रस्ताव रखा था। 15 अगस्त 1936 ई की बात है जब दुनिया के सबसे  बड़े लोकतंत्र के जन्म में 11 साल बाक़ी थे। बर्लिन ओलिंपिक का हॉकी फ़ाइनल मुकाबले में मेज़बान जर्मनी और भारत आमने-सामने थे। स्टेडियम में एडॉल्फ़ हिटलर भी मौजूद थे। जर्मन टीम हर हाल में मैच जीतना चाहती थी, इसके लिये वे धक्का-मुक्की तक पर उतर आए थे। जर्मन गोलकीपर टीटो वॉर्नहॉल्त्ज से टकराने पर ध्यानचंद के दांत तक टूट गए थे, लेकिन वे जल्दी ही मैदान पर लौटे और  उनकी कप्तानी में भारत ने जर्मनी को 8-1 से रौंद डाला। इसके बाद हिटलर ने ध्यानचंद को जर्मन नागरिकता और जर्मन सेना में कर्नल बनाने का प्रस्ताव दिया जिसे 31 साल के ध्यानचंद ने विनम्रता से ठुकरा दिया।


1936 के बर्लिन ओलंपिक में साथ खेले और बाद में पाकिस्तान के कप्तान बने आईएनएस दारा ने वर्ल्ड हॉकी मैगज़ीन के एक अंक में लिखा था, “ध्यान कभी भी तेज़ गति से नहीं  दौड़ते थे, लेकिन उनके पास गैप को पहचानने की गज़ब की क्षमता थी। बाएं फ्लैंक में उनके भाई रूप सिंह और दाएं फ़्लैंक में मुझे उनके बॉल डिस्ट्रीब्यूशन का बहुत फ़ायदा मिला था। डी में घुसने के बाद वो इतनी तेज़ी और ताकत से शॉट लगाते थे कि दुनिया के बेहतरीन से बेहतरीन गोलकीपर के लिए भी कोई मौका नहीं रहता था।”


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ऐसा कहा जाता है कि हॉलैंड में लोगों ने उनकी हॉकी स्टिक तुड़वा कर देखी कि कहीं उसमें चुंबक तो नहीं लगा है जबकि जापान के लोगों को अंदेशा होता था कि उन्होंने अपनी स्टिक में गोंद लगा रखी हो। हो सकता है कि इनमें से कुछ बातें बढ़ा चढ़ा कर कही गई हों, लेकिन अपने ज़माने में मेजर ने किस हद तक अपना लोहा मनवाया होगा इसका अंदाज़ा इस बात से लगाया जा सकता है कि वियना के स्पोर्ट्स क्लब में उनकी एक मूर्ति लगाई गई है जिसमें उनके चार हाथ में चार स्टिकें दिखाई गई हैं, मानों कि वो कोई देवता हों।



HindiNews Team

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