Breaking :

सुलासा और सत्तुका- कहानी

सुलासा और सत्तुका- कहानी

सुलासा और सत्तुका- कहानी

Sulasa And Sattuka

यह उस समय की बात है जब ब्रह्मदत्त बनारस राज्य पर शाषण करते थे. उस राज्य में सुलासा नामक एक सुंदर वेश्या रहती थी. इसके अलावे उस क्षेत्र में सत्तुका नामक एक बलशाली डाकू भी रहता था, जो रात में अमीर लोगों के घरों में घुसकर लूटपाट करता था. एक दिन उस डाकू को पकड़ लिया गया. सुलासा अपनी खिड़की से देख रही थी कि सैनिकों सत्तुका (जिसके हाथ उसकी पीठ के पीछे बंधे थे) को बांधकर सड़क के नीचे से फांसी की जगह की ओर ले जा रहे हैं. (Sulasa And Sattuka)

सुलासा उस डाकू को देखकर एकतरफा प्यार में पर गई और उसे मुक्त कराने के कोशिश में जुट गयी। इसके बाद उसने मुख्य सैनिक को एक हजार सोने के टुकड़े भेजकर सत्तुका को मुक्त करवाया. बाद में उन्हेंने शादी की और कुछ समय के लिए साथ आनंदपूर्ण जीवन व्यतीत किया. लेकिन तीन या चार महीनों के बाद डाकू ने सोचा, “मैं इस एक जगह पर कभी नहीं रह पाऊंगा. लेकिन कोई खाली हाथ नहीं जा सकता. उसके पास बहुत सारे गहने हैं. मैं उसे मारूंगा और ले जाऊंगा.”


तो सत्तुका ने एक दिन सुलासा से कहा, ‘प्रिय, जब मैं राजा के आदमियों के साथ जा रहा था, तो मैंने एक पहाड़ की चोटी पर एक पेड़ के देवता को को कुछ चढ़ाने का वादा किया, जो अब मुझे अपने सपनों में डरा रहा है क्योंकि मैंने अपना वादा पूरा नहीं किया है. इसलिए अपने वादे को पूरा करने हमदोनों वहाँ जाएंगे.”

सुलासा अपने पति की इच्छा को पूरा करने के लिए उसके साथ पहाड़ की चोटी पर जाने को  राजी हो गयी. इसके बाद सत्तुका ने सुलासा से कहा देवता का सम्मान करने के लिए उसे सभी गहने पहन कर जानें होंगें. जब वेदोनों पहाड़ की चोटी पर पहुँचे, तो सत्तुका ने सुलासा को अपना असली उद्देश्य बताया: “मैं यहाँ कोई वादा पूरा करने नहीं आया, तुम्हें मारकर सारे गहने लेकर जाना मेरा उद्देश्य है. तुरंत अपने पहने सभी गहने उतार कर स्वयं के बाहरी परिधान में उनका एक बंडल बनाओ.” 

पत्नी पति से ‘पति, तुम मुझे क्यों मारोगे? गहनों  के लिए.’

‘याद करो मैंने आपकारा जो भला किया है. जब आप जंजीरों में बंधे जा रहे थे, तो मैंने एक बड़ी रकम अदा की और आपकी जान बचाई. हालाँकि मुझे एक दिन में एक हजार सोने के टुकड़े मिल सकते हैं, लेकिन मैंने  कभी किसी दूसरे आदमी की तरफ नहीं देखा. ऐसा उपकार करने वाली मैं हूँ. मुझे मत मारो, मैं आपको बहुत पैसा दूंगा और आपका दासी बन कर रहूँगी. ” लेकिन डाकू के ऊपर कोई प्रभाव नहीं पड़ा, उसे स्वीकार करने के बजाय, उसे मारने की तैयारी जारी रखी.


चूहे की शादी

उसने सत्तुका को बताया कि वह अपने अंतिम समय पर पति को चारों तरफ से सम्मान करना ​​चाहती है.  वह उसके सामने, फिर बायीं और दायीं ओर, लेकिन जैसे ही उसने पीछे की ओर कदम रखा तो पूरे बल से सत्तुका को पकड़ कर एक चट्टान के ऊपर फेंक दिया, मौके पर ही डाकू की मौत हो गयी. जब वह पहाड़ से उतरी और अपने पहचान वाले लोगों के पास लौटी, तो उन्होंने पूछा कि पति कहाँ है? उसने कहा ‘मुझसे नहीं पूछें’ और अपने रथ को बढ़ते हुए वापस राज्य चली गई. (Sulasa And Sattuka)

सीख: कहानी से हमें यह सीखने को मिलती है कि ‘विषम परिस्थितियों में अपना धैर्य नहीं खोना चाहिए और बुद्धिमत्ता पूर्वक कार्य करना चाहिए.’

नोट: यह कहानी प्रसिद्द ‘Jataka Tales’ से सम्बंधित है .


leave a comment

Create Account



Log In Your Account