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क्या मनुष्य चिकन युग में प्रवेश कर गया है?

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क्या मनुष्य चिकन युग में प्रवेश कर गया है?


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आपका आखिरी मांसाहारी भोजन चिकन होने की संभावना काफी ज्यादा है। आखिर क्यों ना हो? यह सस्ते मांसाहारी श्रेणी में जो आता है। चिकन सबसे अधिक खपत होने वाला मांसाहारी खाना है, यह सिर्फ भारत के लिए नहीं है, बल्कि पूरी दुनिया बहुत ज्यादा चिकन का इस्तेमाल खाने में कर रही है। यह हम नहीं कह रहे हैं, बल्कि एक रिपोर्ट(Today top news in Hindi, Today new in Hindi, Latest news update in Hindi) में प्रकाशित हुआ है।


हम जो भी खाते हैं, लेकिन ज्यादातर लोग ब्रोइलर चिकन पर निर्भर हैं। रॉयल सोसाइटी ओपन साइंस जर्नल का कहना है कि पृथ्वी पर हमारा समय बचे हुए चिकन हड्डियों द्वारा चिह्नित किया जाएगा। किसी भी समय पृथ्वी पर लगभग 23 अरब मुर्गियां हैं, इसलिए तकनीकी रूप से, हम चिकन युग में रह रहे हैं।

पत्रिका में कहा(Today top news in Hindi) गया है कि ‘आधुनिक ब्रोइलर मुर्गियां मोर्फोलॉजिकल, आनुवंशिक और आइसोटोपिक रूप से बीसवीं शताब्दी के मध्य से पहले घरेलू मुर्गियों से अलग हैं। अन्य सभी पक्षी प्रजातियों की अपेक्षा आधुनिक ब्रोइलर और बायोमास प्रभुत्व की वैश्विक श्रृंखला मानव हस्तक्षेप का एक उत्पाद है। इस प्रकार, ब्रोइलर मुर्गियां उपभोग पैटर्न विकसित करने के लिए जैवमंडल के परिवर्तन को स्पष्ट रूप से दर्शाती हैं और एंथ्रोपोसिन की बायोस्ट्रेटिग्राफिक मार्कर प्रजाति होने की स्पष्ट क्षमता दिखाती है। ‘ (Today new in Hindi)


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साथ ही, चिकन की मांग किसी अन्य प्रकार के मांस के मुकाबले तेजी से बढ़ रही है। इसकी बढ़ती सर्वव्यापीता को ध्यान में रखते हुए, लीसेस्टर विश्वविद्यालय के अग्रणी शोधकर्ता  इस बारे में उत्सुक थे कि चिकन के लिए वैश्विक भूख, ग्रह को क्या आकार दे रही है और पृथ्वी पर मानवता के प्रभाव में रुचि रखने वाले भविष्य के पुरातत्त्वविदों के लिए चिकन हड्डियों के पीछे क्या संकेत हो सकता है?



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शोधकर्ताओं ने आबादी के आंकड़ों के साथ पुरातात्विक डेटा का संयुक्त रूप से प्रयोग यह समझने के लिए किया कि बीते समय के दौरान मुर्गियों के साथ मानवता का रिश्ता कैसे बदल गया। उन्होंने बताया कि 16 वीं शताब्दी तक इन पक्षियों को जंगली लाल जंगल फाउल से पालतू बनाया गया था। लेकिन 1950 के दशक के दौरान वास्तविक परिवर्तन शुरू हुए। एक गहन प्रजनन कार्यक्रम के परिणामस्वरूप आज आकार में बड़े, ज्यादा मांस वाले , भारी-हड्डियों वाले मुर्गियों उपलब्ध हैं । यह अभियान इतना सफल हुआ कि अभी वाले चिकन, 60 साल पहले वाले अपने पूर्वजों की तुलना में पांच गुना भारी हो गए। (Latest news update in Hindi)



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